पुणे – पुणे का मरुधर जैन ग्रुप जिसकी स्थापना वर्ष 2004 में हुई. प्रोग्राम कर आनंदोत्सव पारंपरिक ढंग से मनाया जाता है, उस समय
ग्रुप स्थापना का मुख्य उद्देश्य था कि राजस्थान के विभिन्न गांवों के परपौत्र की उम्र ज्यादातर 1 वर्ष की अंदर ही होती हैं, इसमें परपोत्र इस
व्यवसाय हेतु पुणे में रह रहे विभिन्न व्यवसाय के हम उम्र मिलनसार विधि से पूर्णतया अनभिज्ञ होता है. वैसे आज के युग में चौथी पीढ़ी
मित्रों का एक ग्रुप बनाना, जिससे उन्हें व्यवसाय में मदद मिले व बहुत ही कम के भाग्य में मिलता है.
आपसी मिलन से एक दूसरे के बच्चों के सगाई संबंध रिश्ते में मदद हो
ग्रुप के मित्रों ने तीसरी पीढ़ी यानी पौत्र-पौत्री व दौहित्र-दोहित्री
सके व आपस में मिलकर तीर्थ स्थान व पिकनिक पर जा सके.
द्वारा उनकी अपनी समझ में अपने मम्मी-पापा के समक्ष इस जैन समाज
आज इस ग्रुप में 50 दंपति व 5 एकल सदस्यों का एक प्रतिष्ठित की पारंपरिक रिवाज को कर सके, प्रथम प्रयास में सामूहिक
ग्रुप बन गया है, जो ग्रुप के लिए गौरव की बात है.
स्वर्णसीढ़ी का समाज में नई जागृति हेतु एक भव्य समारोह आयोजित
आज ग्रुप दो दशक से ज्यादा समय से सुचारू रूप से चल रहा है, किया. सभी 17 स्वर्णसीढ़ी होने वाले अपने परिवारसह व ग्रुप के सभी
अतः ग्रुप ने इस 21 वे गौरवशाली वर्ष निमित्त सभी भूतपूर्व सहित सदस्यों ने पारंपरिक राजस्थानी वेशभूषा में उत्साह से सभी शामिल हुए
वर्तमान अध्यक्ष का अभिनन्दन समारोह करने का निश्चय किया. साथ जिससे यह प्रोग्राम बहुत ही सफलता पूर्वक राजयोग लॉन्स पूणे में पूर्ण
ही साथ विचार विमर्श किया कि अपने जैन समाज में 4थी पीढ़ी के राजस्थानी थीम पर आधारित पत्रिका, बैनर, स्टेज व डेकोरेशन व
परिवार के परपौत्र या परपौत्री द्वारा परदादा-परदादी का स्वर्णसीढ़ी राजस्थानी गीत म्युझिक व संगीतमय वातावरण में कार्यकारिणी सदस्यों के मेहनत से सुसम्पन्न हुआ.
सभी स्वर्णसीढ़ी होने वाले परिवार नामावली के साथ सामाजिक
उत्सव के रूप से तैयार कर यह प्रोग्राम पूर्ण राजस्थानी परम्परागत
विधीसह भव्य वरघोड़ा व बाजते गाजते प्रवेश के साथ दादा-दादी,
नाना-नानी के दुपट्टे व साफा लेडीज क्राउन के साथ दूध-पानी पक्षाल
के पश्चात गुड़ ढेप पर स्वर्णसीढ़ी लगाकर पैर के अंगूठे लगवाए गए.
इस उत्सव में माननीय अतिथि सीनियर एडवोकेट श्री सोहनजी
कुन्दनमलजी जैन (मैनेजिंग चैयरमेन – शिक्षण प्रसारक मंडळी) श्री
इंद्रकुमारजी भीमराजजी छाजेड़ (वर्तमान अध्यक्ष – JITO पूणे), श्री
अचलजी वालचंदजी जैन (अध्यक्ष – पूणे जैन महासंघ व संस्थापक
अध्यक्ष जितो) शामिल हुए.
यह परम्परा जैन समाज में लुप्त न हो ऐसी भावना रख इसे करने का
मानस बनाया, जैन समाज इसको ग्रहण कर नई जागृति हो इसी
सदभावना व विचार के साथ मरुधर जैन ग्रुप आपके समक्ष रख रहे हैं.
प्रोग्राम का सूत्र संचालन एवं मैनेजमेंट एंकर जीतू लोढ़ा (लोढ़ा
इवेंट्स, पुणे-खौड़)
मय
विश्व के जैन जगत में प्रथम बार एक अनूठा सामूहिक स्वर्णसीटी प्रोग्राम वह भी “तीसरी पीढ़ी द्वारा”

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