यह जानने के बावजूद भी रात सोने के लिए होती है और दिन काम
रात की शिफ्ट के दौरान अगर संभव हो तो 20 मिनट या आधे घंटे
करने के लिए, कई बार ऐसी मजबूरी आ जाती है कि न चाहते हुए भी की कम से कम एक ‘पावर नैप’ या नींद की तेज झपकी जरूर ले लें।
हमें रतजगा करने पड़ते हैं। नौकरी में नाइट शिफ्ट या किसी अन्य कारण क्योंकि अगर ऐसी एक झपकी ले ली जाए तो इससे न केवल रात में
से अगर हमें रतजगे करने पड़ें, तो इससे सेहत को होने वाले नुकसान की जगने के दौरान सतर्कता बनी रहती है बल्कि किसी हद तक दिन में
भरपायी कैसे करें? इसके लिए हार्वर्ड मेडिकल स्कूल, नेशनल स्लीप सोते समय रात की नींद की कमी भी पूरी हो जाती है। ‘पावर नैप’ कुछ
फाउंडेशन और ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, ही मिनटों की होने के बावजूद यह अच्छी गुणवत्ता की नींद देती है।
दिल्ली ने कई ऐसे उपाय सुझाए हैं, जिससे लोग रात में जगने के कारण इसी तरह अगर रात में जगने के कारण दिन में नींद आने में दिक्कत हो
अपने स्वास्थ्य को होने वाले नुकसान की भरपाई कर सकते हैं। एंकर तो अपने डॉक्टर से मिले। लगातार नाइट शिफ्ट में जगना पड़ रहा है, तो
स्लीप का मतलब होता है 4-5 घंटे तक लगातार सोना। अगर आपको सिर्फ दिन के समय रात की नींद की भरपायी नहीं करनी होती बल्कि
रात में जगना पड़ रहा है, तो दिन में जब भी सोएं कोशिश करें कि 4-5 अपने मानसिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना जरूरी होता है। इसके लिए
घंटे की नींद एक साथ लें। वास्तव में यही आपकी मुख्य नींद मानी नियमित रूप से ध्यान करें, योगाभ्यास करें, नियमित रूप से हल्की
जाएगी। कोशिश करें कि यह नींद दोपहर 1 बजे से शाम 5 बजे के बीच कसरत करें और परिवार के साथ अपना गहरा जुड़ाव बनाए रखें।
हो। दरअसल इस समय शरीर कुदरती रूप से थकता है और इस समय आने वाली नींद प्राकृतिक नींद के जैसे होती है यानी इसकी गुणवत्ता
किसी हद तक रात की नींद के माफिक होती है। अगर रात में नहीं सो पा
रहे, तो सिर्फ दिनभर जरूरी नहीं है कि दिन में नींद ले बल्कि यह भी
जरूरी है कि दिन में जब भी सोएं, आपके सोने का एक हेल्दी माहौल
होना चाहिए। हेल्दी माहौल से मतलब है, दिन में जब सोएं तो सोने की
जगह ऐसी हो, जहां अंधेरा हो, ठंडक हो और शांति हो। अगर जरा भी
इन स्थितियों में कमी हो तो आंखों पर स्लीप मास्क और कानों में ईयर
प्लग लगाकर सोएं।
डॉ. माजिद अलीम