मुंबई – साधु भूल करे तो श्रावक सुधारे और श्रावक भूल करे शिष्यों में धर्म प्रति जो खुमारी है वो वंदनीय है। नीलेश चंद्र विजय
तो साधु सुधारे, लेकिन दोनों भूल करे तो कौन सुधारे ? ये सवाल इनकी अनमोल पहचान है। धर्म में कहा भी अन्याय होता है तो
का जवाब मुझे तीन थॉय के गच्छाधिपति परम पूज्य हितेश चंद्र निलेश चंद्र विजय वहाँ पहुंच के आवाज़ उठाते है। हार्दिक हुंडिया
विजय जी महाराज के कमाठी पूरा चातुर्मास के प्रवेश में मिला। ये ने कहा की ख़ुद की आत्मा के कल्याण के साथ साथ हमारी
बात कहते हुये जैन समाज के अग्रणी हार्दिक हुंडिया ने बताया कि आत्मा का भी कल्याण करने वाले, जिनके नाम में भी सभी का
इनका जवाब संघ है। जैन धर्म में संघ महान है। इनकी रचना तीन हित है, ईश्वर के आराधक भी है ऐसे महान संत को राष्ट्रीय संत की
लोक के नाथ देवाधिदेव परमात्मा भगवान महावीर स्वामीजी ने की पदवी जल्द गाजे बाजे के साथ सकल संघ की हाजरी में दी जायेगी
थी। परम कृपालु परमात्मा के अनमोल संदेश सवी जीव करू । महाराष्ट्र के मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा, मोहन खेड़ा ट्रस्ट के अग्रणी
शासन रशी की उत्कृष्ट भावना भाने वाले हितेश चंद्र विजय, सुजानमल शेठ, पृथ्वीराज कोठारी, हार्दिक हुंडिया का सम्मान
निलेश चंद्र विजय अन्य मुनि महाराज, साध्वीजी महाराज किया गया। डीसा के प्रसिद्ध बेंड अजंता बेंड, संगीत कार नरेंद्र
चातुर्मास के लिये पधारे है। कमाठीपुरा संघ ने भव्य चातुर्मास वाणी गोता ने भक्ति के साथ संचालन भी किया था। रमेश शाह,
प्रवेश कराया। हार्दिक हुंडिया ने कहा कि चार महिना धर्म ध्यान चंपालाल वर्धन, मंजू लोढ़ा और देश के कई राज्यों से भक्तों ने
करके पुण्य कमाने का अनमोल अवसर है। हितेश विजय जी के चातुर्मास प्रवेश में हाजरी दी थी।
चातुर्मास कार्यक्रम में बहुआयामी व्यक्तियों का सम्मान

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