गुण्टुर नगर में गौतम लब्धि निवास के प्रांगण में आहोर निवासी श्रीमती सुखीदेवी घेवरचन्दजी पालरेचा परिवार द्वारा स्वद्रव्य से निर्मित श्री नेमिनाथ जिन प्रसाद की प्रतिष्ठा सौधर्म बृहत्तपागच्छीय गच्छाधिपति आचार्य श्री जयानन्दसूरिजी के शिष्यरत्न मुनिराज श्री विवेक विजयजी आदि ठाणा की पावन निश्रा में नवान्हिका महोत्सव के साथ उल्लासमय वातावरण में संम्पन्न हुआ. आंध्रप्रदेश में सर्वप्रथम मूलनायक के रूप में भगवान नेमिनाथ के पदार्पण से पूरा माहौल नेमिमय बन गया था.
नेमपथ, नेम तू प्राणधार, अठारह अभिषेक प्रतिदिन दोनों समय होने वाले प्रवचनों के माध्यम से पूरे नगर के आबाल – वृद्धजन नेमिनाथ के भावों में रंग गये. प्रतिष्ठा में पूरे गुण्टुर संघ का उत्साह एवं सहकार का ऐसा वातावरण बना था, जैसे यह व्यक्तिगत नहीं किंतु संघ के जिनालय की प्रतिष्ठा थी.
प्रतिमा की अंजनशलाका युग प्रधान आचार्य सम पूज्य पंन्यास श्री चंद्रशेखरविजयजी के शिष्य रत्न गिरनार तीर्थोपदेशक आचार्य श्री धर्मरक्षितसूरिजी के शिष्य आजीवन आयम्बिल के भीष्म अभिग्रहधारी आचार्य श्री हेमवल्लभसूरिजी के शुभ हस्ते गिरनार की गोद में हुई थी.
प्रतिष्ठा महोत्सव के दौरान वद 14 को संघ में 516 आयम्बिल हुए. थीन दिन तीनों समय पूरे संघ के स्वामीवात्सल्य में जयणापूर्वक व सभी को बैठाकर भोजन करवाया गया. बिना किसी इवेन्ट्स मैनेजमेन्ट के संघ के कार्यकर्ता एवं परिवार के कल्याणमित्रों ने कार्यक्रम का सुव्यवस्थित संचालन किया.
प्रतिष्ठा के दिन ही मुनिराज श्री की निश्रा में श्रेष्ठीवर्य शा पिंकेशकुमार नरसिंगमलजी तातेड के निवास स्थान में गृहमंदिर की प्रतिष्ठा हुई, जिसमें आने वाली चौवीसी के प्रथम तीर्थंकर श्री पद्मनाभ स्वामी बिराजमान हुए.